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श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल-निवासे श्री महा-लक्ष्मी नमो नम:। लक्ष्मी माई सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।।
जप शुरु करने से पहले अपनी रक्षा अवश्य करें।
जिसके कारण यह कुछ राशियों को शुभ फल देता है तो कुछ राशियों को अशुभ फल देता है और अगर आध्यात्मिक की दृष्टि से देखा जाए तो ग्रहण काल का समय साधकों के लिए किसी प्रकार के वरदान से कम नहीं होता है.
shatru nashak mantra : Shatru nashak kali mantra
श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम
आध्यात्मिक उन्नति: हनुमान जी के शाबर मंत्रों के माध्यम से साधक ज्ञान, मोक्ष, और आत्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकता है।
रोग निवारण: शाबर मंत्रों का उपयोग भूत-प्रेत बाधा, मानसिक तनाव, और शारीरिक रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है।
तंत्र मंत्र स्मरण शक्ति के लिए मंत्र : स्मरण शक्ति को कैसे तेज़ करे?
हिंदू धर्म में वर्णित मंत्रों के इस्तेमाल के द्वारा एक सिद्ध तांत्रिक चाहे तो किसी भी व्यक्ति को गायब कर सकता है या फिर किसी भी व्यक्ति को अन्य रूप में परिवर्तित कर सकता है. इसके अलावा एक सिद्ध तांत्रिक मरी हुई आत्माओं से बात भी कर सकता है, हालांकि किसी भी प्रकार की सिद्धि को करने के लिए नियम और कुछ विधि बनी हुई होती है और जो साधक साधना को करने के लिए नियमों का पालन करता है उसकी ही सिद्धि होती है.
इसके बाद जब सूर्य ग्रहण खत्म हो जाए तब आपने जो भी कपड़े पहने हुए हैं उसी के साथ जाकर पानी से स्नान कर ले. इस तरह सूर्य ग्रहण की अवधि में आपके द्वारा जाप किए गए साबर मंत्र का असर होने लगेगा और उसकी सिद्धि हो जाएगी, सिद्ध होने के बाद आप साबर मंत्र का इस्तेमाल दूसरों की भलाई के लिए कर सकते हैं.
इस तरह साधक शाबर मंत्र check here साधना करके इस मंत्र को सिद्ध कर सकता हे और किसीकी परेशानी को दूर कर सकता हे,मेरा सभी साधक मित्रो से बस यही कहना हे की कोई भी साधना करो पर किसी व्यक्ति के भले काम के लिए उस साधना का इस्तेमाल करना चाहिए अगर किसीका बुरा करोगे तो खुद आपका बुरा होगा,किसीका अच्छा ना कर सको तो कुछ नहीं पर किसीका बुरा मत करना बस आप साधक मित्रो से मेरा यही ही निवेदन हे.
उदाहरणार्थ यदि आपके मन में एक साथ एक हजार विचार चल रहे हैं तो उन सभी को समाप्त करके मात्र एक विचार को ही स्थापित करना ही मंत्र का लक्ष्य होता है। यह लक्ष्य प्राप्त करने के बाद आपका दिमाग एक आयामी और सही दिशा में गति करने वाला होगा।
साधना शान्त, नियत स्थान पर एकांत में ही करें।
साधना के समय एकांत में रहें और अन्य गतिविधियों से बचें।